शिव चमत्कार –  शिव जी कृपा से करण की किडनी ठीक हुई

आप रोजाना शिवजी के बारे में नई नई जानकारियां पाते हो क्योंकि हमारे देश में दिन-प्रतिदिन शिवजी पर भरोसा करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और शिवजी पर लोग बहुत ही ज्यादा भरोसा इसलिए करते हैं क्योंकि शिव जी के भक्तों के ऊपर किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती हैं और जो लोग शिवजी की पूजा अपने घरों में सच्चे मन से करते हैं उन लोगों के घर में हमेशा खुशियां ही खुशियां रहती हैं आप प्रदीप मिश्रा जी को जानते ही होंगे प्रदीप मिश्रा जी का जन्म सीहोर नामक स्थान पर हुआ था और यह बचपन से अभी तक शिवजी की पूजा करते हुए आ रहे हैं।

जिस कारण इनके ऊपर शिव जी की कृपा बसी हुई है और लोगों द्वारा ऐसा सुनने में आता है कि पंडित प्रदीप मिश्रा जी कभी भी बीमार नहीं होते हैं इसका कारण यह है कि प्रदीप मिश्रा जी रोजाना शिवजी की पूजा करते हैं और शिव जी के ऊपर जल चढ़ाते हैं।

प्रदीप मिश्रा जी अपने दरबार में आए हुए लोगों को एक बार शिव चमत्कार के बारे में एक ऐसी जानकारी देते हैं जिसे लोग सुनकर हैरान हो जाते हैं क्योंकि यह एक ऐसी घटना थी जिस पर यकीन करना मुश्किल था ।

प्रदीप मिश्रा जी अपने आए हुए दरबार में लोगों को एक व्यक्ति के बारे में जानकारी देते हैं कि करण की शादी हो जाने पर करण का एक किडनी खराब जाता है जिस कारण उसकी मृत्यु बहुत ही नजदीक आ जाती है डॉक्टर यह बताते हैं कि करण लगभग 1 से 2 साल का मेहमान है ऐसे में आप करण की इच्छाएं पूरी कर दें इस बात को सुनने पर करण को बहुत ही अफसोस होता है किंतु करण एक समझदार व्यक्ति था और करण को समाज के बीच में बैठने में बहुत ही अच्छा लगता था एक बार ऐसा होता है कि करण को एक बुजुर्ग सीहोर नामक स्थान पर शिवजी की पूजा करने के लिए जाने को कहते हैं क्योंकि इस स्थान पर जाने से लगभग सभी लोगों की बीमारियां दूर हो जाती हैं ऐसे में आप भी इस स्थान पर जाएं क्या पता आपके भी ऊपर शिवजी की कृपा बरस जाए ।

जब करण शिवजी की पूजा करने के लिए जाता है तो उसकी बीमारी बहुत ही जल्दी ठीक हो जाती है यदि आप इस चमत्कार के बारे में पूरी जानकारी पाना चाहते हो तो आप इस पोस्ट को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें ताकि आप सभी लोगों को शिव चमत्कार के बारे में पूरी जानकारी समझ में आ सके।

मुंबई राज्य में एक करण नाम का लड़का रहा करता था और यह अपने जीवन में हमेशा खुश रहा करता था एक बार ऐसा होता है कि करण अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए चंडीगढ़ जाता है और चंडीगढ़ में बहुत ही इंजॉय करता है जब चंडीगढ़ से घर आने के लिए अपने दोस्तों से कहता है तो उसके दोस्त चंडीगढ़ में एक ऐसे स्थान के बारे में बताते हैं जोकि कानन उस स्थान पर कभी भी नहीं गया था ऐसे में करण उस स्थान पर जाने के लिए और भी दिन वहीं पर गुजार देता है फिर चंडीगढ़ में करण और करण के दोस्त घूम लेने के बाद घर आने का प्लान करते हैं और की टिकट निकालकर सभी लोग घर पर आ जाते हैं घर पर आने के बाद चंडीगढ़ के बारे में अपने परिवार के सभी सदस्यों से हर एक चीज के बारे में जानकारी देते हैं और यह भी बताते हैं कि चंडीगढ़ में हमने कौन सी नई नई चीजों को देखा है।

हालांकि करण अब थक चुका था जिस कारण करण अब सोने के लिए अपने रूम में जाता है और सो जाता है जब करण सो कर उठता है तो कुछ काम करण को याद आ जाते हैं जिस कारण वह बिना घर पर बताएं बाजार की ओर चले जाता है और करण बाजार में जाते वक्त यह देखता है कि बाजार में बहुत ही भीड़ है किंतु करण का काम बहुत ही जरूरी था जिस कारण करण बाजार में ही दौड़ कर आगे की ओर बढ़ने लगता है अचानक से एक गाड़ी आ जाती है और वह गाड़ी करण को टक्कर मार देती है जिस कारण करण के बदन से बहुत ही खून गिरने लगते हैं ऐसे में वहां पर जितने भी लोग खड़े थे एंबुलेंस को बुलाते हैं और एंबुलेंस में करण को डाल देते हैं ।

फिर करण हॉस्पिटल में पहुंच जाता है हालांकि करण के पेरेंट्स को इस बात का पता नहीं था लेकिन जो करण को हॉस्पिटल में लाया था वह कर्म से बहुत ही अच्छी तरीके से परिचित था और वह तुरंत करण के मम्मी पापा को फोन लगाकर इस घटना के बारे में बता देता है और फिर करण के मम्मी-पापा करण के पास अर्थात हॉस्पिटल में आ जाते हैं फिर करण को एडमिट कर आते हैं जब करंट एडमिट हो जाता है तो करण का ट्रीटमेंट कराया जाता है और फिर करण के पेट में चेकअप किया जाता है जब पेट में चेकअप हो जाता है तो यह पता चलता है कि करण की एक कितनी खराब हो चुकी है और इसी कारण कर्ण की मृत्यु बहुत ही नजदीक आ चुकी है।

करण का चेकअप अच्छे तरीके से किया जाता है किंतु चेकअप में यही रिपोर्ट आती है और इसी कारण जब करण का ट्रीटमेंट हो जाता है तो डॉक्टर बाहर की और आने लगते हैं और करण के पेरेंट्स को इस बात के बारे में बताते हैं करण के पेरेंट्स को इस बात का पता लगाने पर बहुत ही अफसोस होता है क्योंकि कर्ण की मृत्यु बहुत ही जल्दी होने वाली है इसी कारण सभी लोग जोर जोर से रोने लगते हैं लेकिन करण की स्थिति बहुत ही खराब थी।

करण के पेरेंट्स करण को ठीक होने के लिए 1000000 रुपए खर्च कर दिए किंतु करण ठीक नहीं हो पाया और जिन भी हॉस्पिटल में कर्ण को एडमिट कराया जाता था और डॉक्टर लोग उसको यही जवाब देते हैं कि आपका बेटा ठीक नहीं हो पाएगा इसी कारण आप अपने बच्चे का ट्रीटमेंट कहीं पर भी ना कराएं।

हालांकि करन अब घर पर रहने लगा था और करण धीरे-धीरे करके चलने लगा था लेकिन करण की स्थिति वही थी कुछ दिनों बाद कारण समाज में बैठने लगा और समाज में बैठे-बैठे उसे इस बात का पता लगा कि सीहोर नामक स्थान पर प्रदीप मिश्रा जी का दरबार है और इस दरबार में शिवजी की पूजा होती है और जो लोग शिवजी की पूजा इस स्थान पर जाते हैं उनके सभी कष्ट शिव जी की कृपा से दूर हो जाते हैं ऐसे में करन इस स्थान पर जाने के लिए अपने मम्मी पापा से कहता है तो करण के मूवी पापा उसे जाने के लिए हा कह देते हैं।

करन अगले ही दिन इस स्थान पर जाने की तैयारी करने लगता है और शाम तक इस स्थान पर पहुंच जाता है जब करण शिवजी की पूजा करने के लिए जल को लेने जाता है तो प्रदीप मिश्रा जी इस लड़के को देख रहे थे और जब करण शिवजी के ऊपर जल चढ़ाता है तो प्रदीप मिश्रा जी आकर उस लड़के से मिलते हैं और करण की बीमारी के बारे में कर्ण को ही बता देते हैं करण इस बात को सुनकर हैरान हो जाता है लेकिन प्रदीप मिश्रा जी कर्म को यह जवाब देते हैं कि आपकी बीमारी बहुत ही जल्द ठीक हो जाएगी आप केवल एक शिवजी के नाम पर एक बेलपत्र लिख दो उस बेल पत्र में अपने इस घटना के बारे में जानकारी लिखना है और जब आप इस बेलपत्र को लिख लेते हो तो आप शिव जी के चरणों में चढ़ा कर घर चले जाएं और घर जाते वक्त पीछे की ओर न देखें।

प्रदीप मिश्रा जी के द्वारा कही गई बातों का पालन कर्म करता है और बेल पत्र लिखकर घर की ओर चले जाता है ऐसा करीबन कई दिनों तक चलता रहा जब करण की दवा खत्म हो गई तो कारण अपनी दवा को लेने के लिए हॉस्पिटल में जाता है और कुछ देर तक डॉक्टरों से बात करता रहा फिर डॉक्टर करण का चेकअप करते हैं चेकअप करने के दौरान डॉ तीन बार चेक करते हैं जब चेकअप हो जाता है तो  डॉक्टर रिपोर्ट को देखते वक्त हैरान हो जाते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है रिपोर्ट चेक करते हैं तो उनके सामने यह रिजल्ट आता है कि करण की कितनी धीरे-धीरे करके सही हो चुकी थी आप डॉक्टर खुशी-खुशी बाहर आता है और कर्ण को इस बात के बारे में बताते हैं और करण से पूछते हैं कि आप ऐसे कौन से डॉक्टर का दवा खा रहे हो जो की किड़नी खराब हो जाने पर आप की किडनी ठीक हो गई ऐसा कैसे।

फिर करण बताता है कि मैं केवल आपके द्वारा बताए गए दवा को ही खाता रहा किंतु मैं शिवजी के ऊपर सच्चे मन से भरोसा किया और इसी कारण शिवजी की रोजाना पूजा करता रहा और शिव जी के मंत्र का उच्चारण करता रहा फिर डॉक्टर कहते हैं कि यह सब कृपा शिवजी की है और आप शिवजी की चलते ठीक हो पाए हो।

फिर एक हफ्ते बाद करण प्रदीप मिश्रा जी के दरबार में जाता है और इस घटना के बारे में बताता है फिर प्रदीप मिश्रा जी उस लड़के को एक जवाब देते हैं कि आपने जो बेलपत्र लिखा था यह सब उसी की देन है फिर करण खुशी-खुशी घर आता है और अपने घर पर शिवजी की पूजा कर आता है और शिव जी के प्रसाद को अपने गांव में सभी लोगों को बांटता है और गांव के सभी लोगों को इस घटना के बारे में बताते हैं इस तरीके से शिव जी की कृपा करण के ऊपर बसी हुई है।

जय भोलेनाथ।

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