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  • सूरज जायसवाल—|||——
सीटों को लेकर महागठबंधन में दरार पड़ती नजर आ रही है। विपक्षी एकता प्रदर्शन में चार प्रमुख नेताओं के कमी के चलते इस बार का शपथ ग्रहण समारोह फीका नजर आया। कर्नाटक के शपथ ग्रहण समारोह में जो विपक्षी एकजुटता देखने को मिली थी। इस बार के शपथ ग्रहण में वैसा देखने को नहीं मिला। क्योंकि देश के चार प्रमुख नेताओं की दूरी बना लेने से विरोधी एकता कमजोर होती नजर आई।
कांग्रेस को लेकर सभी विरोधी दल महागठबंधन के बैनर तले आने को तैयार है। हर विरोधी दल अपने राज्य में कांग्रेस के साथ चुनाव मैदान में जाने की तैयारी में भी है। बिहार में कांग्रेस के साथ पांच दलों का मिलन हो गया। मायावती, ममता, अखिलेश और केजरीवाल गठबंधन के लिए तैयार अभी नहीं है। इसलिए ही इन्होंने कांग्रेस के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था। इसी को लेकर बुआ व भतीजा उस बैठक में भी नहीं गए जहां 21 दलों के लोग एक साथ जुटे हुए थे।
तीन राज्यों में मिली जीत के बाद कांग्रेस ने माया, ममता और अखिलेश के समक्ष ज्यादा सीटों की मांग रख दी। इस प्रस्ताव से नाराज इन नेताओं ने कांग्रेसी से दूरी बना ली। सूत्रों की मानें तो काग्रेस यूपी में 21 सीटें चाहती है। उसका कहना है कि 2004 के निर्वाचन आधार पर समझौता हो तो हम लोग भाजपा को यूपी से उखाड़ फेंकने में कामयाब होगे। बता दे कि 2004 में यूपी लोकसभा में कांग्रेस को 21, सपा को 23 और बसपा को 22 सीटें मिली थी। कांग्रेसी इसी प्रकार सीटों को बांटने की बात कह रही है। 
इधर कांग्रेस को बाहर रखते हुए यूपी गठबंधन ने बसपा को 38, सपा को 37 और रालोद को 3 सीटें देने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस प्रकार 78 सीटों पर बंटवारा तय कर दिया गया है। बचे दो सीटों को सोनिया और राहुल के लिए छोड़ी गयी है। इसके अलावा अन्य छोटे दलों को अखिलेश अपने कोटे से भी मैनेज करेंगे। सपा के सभी गढो़ पर इस बार भी समाजवादियों का ही बोलबाला रहेगा। पिछले चुनाव में कांग्रेस के खाते में यहां से दो ही सीटें गई थी। जबकि उसके साथ उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे हैं। इस प्रकार कांग्रेस को 9 सीट पर ही दावा ठोकने का अधिकार है। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस ने अपना मुंह बड़ा कर लिया है। इसलिए ही बुआ व भतीजा राहुल से अब नाराज चल रहे हैं।
कांग्रेस को अपने गढ़ में सीटें देनी न पड़े इसलिए ही ममता बनर्जी तीसरा मोर्चा बनाना चाहती थी। अपने दम पर मोदी लहर को बंगाल में रोकने वाली ममता ने भाजपा को 2 सीट पर ही समेट दिया था। यह टीएमसी के 34 माननीय निर्वाचित हुए थे। महागठबंधन के नाम पर कांग्रेसी ममता से भी ज्यादा सीटें एठना चाहती है। इसके लिए ममता तैयार नहीं है। इसलिए ही उन्होंने कमलनाथ और अशोक गहलोत के शपथ ग्रहण में जाना ठीक नहीं समझा। अरविंद केजरीवाल भी कम सीटों का रोना रो रहे हैं। उनके दिल्ली में मात्र सात ही सीटें है। महागठबंधन में साथ रहने से उनकी तीन सीटें कम होती नजर आ रही है। ऐसे में वह भी अपनी राह अलग करने में लगे हुए हैं। कांग्रेस से छुटकारा पाने के लिए ही आप ने विधानसभा में भारत रत्न का मुद्दा उछाल दिया है।
सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की ओर से जो हवा उड़ाई जा रही है। इससे माया, ममता, अखिलेश और केजरीवाल की गणित फेल होती नजर आ रही है। कांग्रेस के लिए ममता अपने माननीयो की आहुति देने को तैयार नहीं है। इसलिए वह अब फिर से तीसरे विकल्प की ओर बढ़ने लगी हैं। तेलगाना के के चंद्रशेखर के साथ ममता अपनी तार जोड़ रही है।