ASHOK KUMAR SRIVASTAVA
आजमगढ़। करोड़ों रूपये की लागत से बना आजमगढ़ का सुपर फिसेलिटी हास्पिटल एवं मेडिकल कालेज पूरी तरह से बदहाल है। कहने को तो यह समाजवादी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। इसके शिलान्यास व लोकार्पण के मौके पर यही दावे किये गये थे कि इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल से आजमगढ़ ही नहीं वरन आस-पास के जिलों की दिक्कतें दूर हो जायेंगी और किसी मरीज को लखनऊ के पीजीआई नहीं जाना पड़ेगा। सच तो यह है कि उसी तरह से बनाया भी गया और मशीनें भी वैसी ही अत्याधुनिक मुहैय्या करायी गयी मगर विशेषज्ञों की तैनाती सुनिश्चित नहीं की जा सकी। ऐसी स्थिति में यह सुपर फिसेलिटी हास्पिटल बेमतलब साबित होकर रह गया है।
आजमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर चक्रपानपुर जैसे वीराने में 114 एकड़ के विशाल भू-भाग में बना यह सुपर फिसेलिटी हास्पिटल एवं मेडिकल कालेज न तो किसी राष्टï्रीय राजमार्ग पर है और न ही राज्यीय राजमार्ग पर ही। लिंक मार्ग पर होने की वजह से आवागमन के समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। हाल यह है कि शाम के 6 बजे के बाद यहां आना-जाना काफी मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके करोड़ों की लागत से सपा के तत्कालीन राष्टï्रीय महासचिव अमर सिंह के प्रयास से उनके गृह जनपद में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में वर्ष 2006 में इसका लोकार्पण हुआ। आलीशान बिल्डिंगें बनायी गयी और मंहगी अत्याधुनिक मशीनें भी लगायी गयी। दिक्कत बस यह हो गयी कि बेवजह बदनाम आजमगढ़ जिले के वीराने में स्थित इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल एवं मेडिकल कालेज में सेवायें देने के लिए न तो अच्छे डाक्टर्स व प्रोफेसर्स आये और न ही मशीनों का संचालन करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ ही। इन स्थितियों के बीच यह हास्पिटल व मेडिकल कालेज पूरी तरह से अस्तित्वहीन होकर रह गया है। हाल यह है कि तकनीकी विशेषज्ञों के अभाव में एमआरआई, एक्स-रे, सिटी स्कैन, अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी मामूली जांच भी यहां संभव नहीं हो पा रही है। साथ ही सारी व्यवस्थायें होने के बावजूद पैथालॉजी का भी संचालन नहीं हो पा रहा। यहां के प्राचार्य प्रो. डा. गणेश कुमार रेडियोलाजिस्ट तो हैं मगर वह समय नहीं दे पाते। साथ ही रिपोर्ट निकालने वालों का भी अभाव है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के न आने की वजह से शहर में निजी प्रैक्टिस करने वाले कुछ एमबीबीएस डाक्टरों को संविदा पर यहां तैनाती देकर किसी तरह से ओपीडी चलायी जा रही है। ओपीडी करने वाले यह चिकित्सक शहर स्थित अपने डिस्पेंशरी या हास्पिटल पर मरीजों को आने के लिए प्रेरित करते हैं। इस वीराने में आने की दिक्कतें झेलने वाले मरीज भी शहर में ही उसी डाक्टर को दिखा लेना बेहतर समझते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की अनुपलब्धता बताकर जांच जहां बाहर की लिखी जाती है, वहीं दवाइयों की उपलब्धता के बावजूद कमीशन के चक्कर में ज्यादातर बाहर की ही दवाइयां लिख दी जाती हैं। दिक्कत यह भी है कि ओपीडी करने वाले डाक्टर रेगुलर नहीं हैं। किसी भी डाक्टर की दो दिन से अधिक ड्यूटी नहीं होती है। ऐसे में भी मरीज शहर में उनकी प्रतिदिन उपलब्धता होने के कारण वहीं जाना बेहतर समझता है। यहां की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। इस अस्पताल के आसपास एक्सीडेंट या अन्य कोई हादसा होने पर लोग यहां ले जाकर समय बर्बाद करने की बजाय जिला अस्पताल ही जाना ज्यादा बेहतर समझते हैं।
डाक्टरी पढ़ रहे छात्रों का भविष्य अधर में
आजमगढ़। आजमगढ़ के चक्रपानपुर स्थित इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल एण्ड मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। पढ़ाई भी हो रही है मगर पढ़ाने वाले ही नहीं हैं। योग्य प्रोफेसर्स की तैनाती न होने की वजह से कम योग्यता वाले लोग यहां तक कि सिम्पल एमबीबीएस डाक्टर ही इनका क्लास ले रहे हैं। इन स्थितियों के बीच यहां पढऩे वालों को एमबीबीएस की डिग्री भले ही मिल जाये मगर वह कितने योग्य डाक्टर बनेंगे, इसकी कल्पना की जा सकती है।
पैरामेडिकल कालेज के लिए भी अधिग्रहित की गयी जमीन
आजमगढ़। 114 एकड़ के विशाल भू-भाग में बने इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल एण्ड मेडिकल कालेज में जो है उसी का अभी सही से संचालन नहीं हो पाया और नये प्रोजेक्ट के साथ इसे विस्तार देने का काम शुरू कर दिया गया। सच यही है कि अभी न तो सही से अस्पताल चल रहा है और न ही मेडिकल कालेज। पहले इसके सही संचालन पर ध्यान देना चाहिए था। इसके विपरीत यहां इसे विस्तार देने के मकसद से पैरामेडिकल कालेज खोलने के लिए कई एकड़ जमीन अधिग्रहित कर ली गयी है।
मायावती के कार्यकाल में उठाकर जा रही थी मशीनें
आजमगढ़। राजनैतिक विद्वेष की भावना से इसके पहले की मायावती की सरकार में इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल की अत्याधुनिक मशीनों को  उठाकर अम्बेडकरनगर ले जाया जा रहा था। कई मशीनें ट्रक पर लद भी चुकी थी। इसी बीच इसकी भनक स्थानीय लोगों को लग गयी। उन लोगों ने ट्रक को रोक लिया और सपा से अलग होकर अमर सिंह द्वारा बनाये गये संगठन लोकमंच के तत्कालीन जिलाध्यक्ष वीरभद्र प्रताप सिंह व विजेन्द्र सिंह को इसकी सूचना दी। लोकमंच के लोग तत्काल मौके पर पहुंच गये और मशीनों को जबरन उतरवाकर उसी जगह रखवाया। कई दिनों तक आन्दोलन चलता रहा। सपा के तत्कालीन एमएलसी कमला प्रसाद यादव भी मजबूती से आन्दोलन में शरीक हुए। तब कहीं जाकर मशीनों का स्थानान्तरण रूका।
स्टाफ नर्सों के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार
आजमगढ़। आजमगढ़ के इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल में तैनात नर्सों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। गड़बड़झाला का आलम यह कि जीओ के अनुसार इन्हें आवास नहीं दिया जा रहा है। पे-ग्रेड के हिसाब से ये स्टाफ नर्सें टाइप-2 या टाइप-3 का आवास पाने के लिए अधिकृत हैं मगर इन्हें निचले कटेगिरी का आवास दिया गया है। इसके विपरीत इनसे निचली कटेगिरी के फार्मासिस्ट, बाबू, वार्ड ब्वाय आदि को इन्हें दिया जाने वाला आवास आवंटित किया है। इसे लेकर इन स्टाफ नर्सों ने कई बार हंगामा भी काटा। अभी कुछ दिन पहले ही कुछ स्टाफ नर्सों ने खाली पड़े टाइप-2 व टाइप-3 के आवासों पर जबरन कब्जा जमा लिया। यह स्टाफ नर्सें उसके लिए अधिकृत थी। यही वजह रही कि अस्पताल प्रशासन ने कुछ बोलने की बजाय चुप ही रहना बेहतर समझा। बोलता भी क्या। टाइप-2 की 7 बिल्ंिडगें हैं और उतनी ही टाइप-3 की भी। हर बिल्ंिडग में 18 आवास है। अनाधिकृत लोगों को देने के बाद भी कई आवास खाली थे। ऐसे में उसपर अधिकृत लोग काबिज हो गये तो कौन बोल सकता था। बोलने पर हंगामा होता। जिला प्रशासन दखल देता तो सारे अनाधिकृत लोग बाहर हो जाते।
दुव्र्यवस्थाएं दूर करने का किया हर संभव यत्न- प्रो. गणेश
आजमगढ़। प्राचार्य प्रो. डा. गणेश कुमार का कहना है कि उन्होंने दुव्र्यवस्थाओं को दूर करने का हर संभव प्रयत्न किया। हम चाहते हैं कि योग्य डाक्टर्स व प्रोफेसर्स आयें। इसके लिए कई बार लिखा-पढ़ी की गयी। शासन ने जिन्हें भेजा वह आये ही नहीं। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं। लिखा-पढ़ी करने से अधिक और कुछ अधिकार में भी तो नहीं है।
आने वाले समय में होगा सुधार- डा. चन्द्रा
आजमगढ़। इस सुपर फिसेलिटी हास्पिटल के सीएमएस डा. दिनेश चन्द्रा का मानना है कि आने वाले समय में सुधार होगा। उनका कहना है कि वह लगे हुए हैं कि यहां पर अच्छे डाक्टरों की तैनाती हो और यह सुपर फिसेलिटी हास्पिटल अपने उद्देश्यों को पूरा करते हुए आमजन को बेहतर से बेहतर सेवायें मुहैय्या कराये। आने वाले समय में ऐसा जरूर होगा।
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