ASHOK KUMAR SRIVASTAVA
आजमगढ़। आजमगढ़ में ईमानदार आन्दोलन का दूसरा नाम भारत रक्षा दल है। यह सामाजिक संगठन अब तक 21 घूसखोर अधिकारियों-कर्मचारियों को पकड़वा चुका है। सेवा व समर्पण भी इस संगठन की खास पहचान है। इस संगठन ने अब तक 165 लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार किया है। आमजन से जुड़े मुद्दों को लेकर इनका संघर्ष लगातार चलता ही रहता है। इसके साथ ही अपने अधिकारों के प्रति यह संगठन आमजन को जागरूक करता है तो देश व समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध भी कराता है।
ईमानदारी से मूल्यांकन किया जाय तो आजमगढ़ में जमीनी स्तर पर काम करने वाला एकमात्र संगठन भारत रक्षा दल ही है। इस संगठन के कार्यों से इस जिले के लोग जहां लाभान्वित हो रहे हैं, वहीं इसके कार्यों का असर भी नजर आता है। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टïाचार जब इस संगठन को चुभा तो इन्होंने गोरखपुर एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क साधकर पहला घूसखोर चिट फण्ड कार्यालय के लिपिक ज्ञानचन्द रावत को वर्ष 2006 में रंगेहाथ पकड़वाया। भ्रष्टïाचार के खिलाफ शुरू किया गया यह अभियान फिर तो थमने का नाम ही नहीं लिया और लगातार आगे बढ़ता चला गया। परिणाम यह रहा कि यह संगठन अब तक जिला पूर्ति अधिकारी भागीरथी सिंह, सीएमओ के एम अग्रवाल व पुलिस भर्ती बोर्ड का सदस्य बनकर आजमगढ़ आये एएसपी राजेश कृष्ण सहित 21 घूसखोर अधिकारियों-कर्मचारियों को गिरफ्तार करा चुका है।
 
इस संगठन ने हमेशा कुछ नया और बेहतर किया। इस संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव एवं जिलाध्यक्ष उमेश सिंह गुड्डïू 8 अगस्त 2013 को सिधारी पुल पर टहल रहे थे। इन लोगों ने देखा कि कुछ पुलिस वाले एक शव को पुल से नीचे फेंक दिये। तभी कुछ कुत्ते उस लाश को नोंचने लगे। पूछने पर पता चला कि ऐसे तो रोज होता है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस वाले लावारिश लाशों को ऐसे ही फेंकते हैं और यूं ही कुत्ते उन्हें नोंचते खसोटते हैं। संगठन के इन दोनों जिम्मेदार लोगों ने वहीं पुल पर बैठकर आपस में कुछ देर मंत्रणा की। कहा लावारिश इंसानों का यह हश्र ठीक नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि ऐसा होने से हमारी तमसा नदी भी गंदी हो रही है। फिर क्या था। लावारिश लाशों को वारिश मिल गया। उन्होंने यह तय कर लिया कि अब सभी लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार उनका संगठन करेगा। अगले दिन से उनके कार्यकर्ता पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचने लगे। जो भी लावारिश शव होते उसे पोस्टमार्टम के बाद लेकर अंतिम संस्कार करने लगे। कुछ ही दिनों में पूरा पुलिस महकमा यह बात जान गया। अब तो स्थितियां यह हैं कि जिस भी थाना क्षेत्र में लावारिश लाश मिलती है, वहां के थानाध्यक्ष का फोन तत्काल इस संगठन के जिलाध्यक्ष के पास आ जाता है। ऐसे में पोस्टमार्टम के बाद भारत रक्षा दल के कार्यकर्ता उस शव को मर्चरी हाउस से ले लेते हैं और उसका अंतिम संस्कार कर देते हैं। अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, उमेश सिंह गुड्डïू, रणजीत सिंह, सुनील यादव, आरपी श्रीवास्तव, जैनेन्द्र चौहान, धर्मवीर विश्वकर्मा, गोपाल प्रसाद निभाते हैं। जिलाध्यक्ष उमेश सिंह गुड्डïू कहते हैं कि कभी-कभी कई दिनों की सड़ी हुई लाशें मिलती हैं, जो काफी दुर्गन्धपूर्ण होती हैं, फिर भी उनके कार्यकर्ता अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होते और उसका भी अंतिम संस्कार करते हैं। एक बार इस संगठन ने सूचना के अधिकार से पुलिस कप्तान से जानकारी मांगी कि लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार के लिए कितना पैसा मिलता है। उन्होंने जानकारी दी कि 2700 रूपये मिलते हैं। यह संगठन तो ये रूपये लेता नहीं। ऐसे में ये रूपये कहां चले जाते हैं, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। इतना ही नहीं पितृ पक्ष में यह संगठन अंतिम संस्कार किये गये लावारिश लोगों को पिण्डदान भी करता है। तमसा तट स्थित राजघाट पर श्राद्घ कर्म करने के शहर के अम्बेडकर पार्क में विशाल सामूहिक भोज भी किया जाता है। इस सामूहिक भोज में हजारों लोग शिरकत करते हैं।
यह संगठन हमेशा कानून के दायरे में रहकर देश व समाज के लिए काम करता रहा है। सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर इनका संघर्ष लगातार चलता ही रहता है। मकर संक्रांति पर यह संगठन जाति तोड़ो, देश जोड़ो के नारे के साथ सामूहिक खिचड़ी भोज का आयोजन करता है। महापुरूषों की जयंती पर पूरे जिले के सभी महापुरूषों के प्रतिमाओं की साफ-सफाई की जाती है। हर 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द बोस की जयंती पर यह संगठन बड़ा कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके अलावा युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भरने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों को यह संगठन पुरस्कृत भी करता है। सूचना अधिकार कानून के प्रति युवाओं को जागरूक करने के साथ ही इस संगठन ने कार्यशालायें आयोजित कर उन्हें प्रशिक्षित किया। लावारिश व जरूरतमंद लोगों को रक्तदान, गरीब व निर्धन परिवार की लड़कियों का ब्याह सहित इस संगठन ने इतने सारे कार्य किये हैं, जितने कार्य सिर्फ कल्पनाओं में करने को सोचा जा सकता है। बावजूद इसके इस संगठन को आजतक कोई सरकारी पुरस्कार नहीं मिला है। वैसे संगठन के लोगों को किसी सरकारी पुरस्कार की चाहत भी नहीं है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव  कहते हैं कि ईमानदार कार्यों की वजह से आमजन के बीच जो स्नेह मिलता है वह किसी भी सरकारी पुरस्कार से बड़ा है।
 
भारत रक्षा दल का दर्द
आजमगढ़। भारत रक्षा दल के जिलाध्यक्ष उमेश सिंह गुड्डïू कहते हैं कि भ्रष्टïाचार के लिए व्यवस्था ही जिम्मेदार है। शासन-सत्ता में बैठे लोग भी कम दोषी नहीं हैं। कहते हैं कि जब मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव लडऩे आये तो उनके भतीजे सांसद धर्मेन्द्र यादव उन्हें बुलाकर मिले थे। सपा सुप्रीमों को जिताने की बात कहे। हमने कहा कि वह बड़े नेता हैं, उन्हें तो जिताया ही जायेगा मगर हमारी तीन मांगे हैं। उन तीन मांगों में हमने विद्युत शवदाह गृह, सरकारी जिला अस्पताल में न्यूरो चिकित्सक एवं आजमगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो की इकाई खोलने की मांग रही। धर्मेन्द्र भी कहे कि यह मांगें तो राज्य सरकार ही पूरी करेगी। तीनों मांगें चुनाव बाद पूरी कर दी जायेगी। चुनाव बीत गया, कुछ नहीं हुआ। कुछ महीनें बाद एक कार्यक्रम में धर्मेन्द्र जिले में आये थे। उनसे मिलकर फिर उन्हें ज्ञापन दिया। वह कहे याद है, सभी मांगें पूरी जल्द ही पूरी कर दी जायेगी, उनका यह जल्द अभी तक नहीं आया। आजतक एक भी मांग पूरी नहीं की गयी। यदि उनकी मांगे पूरी हो जाती तो विद्युत शवदाह गृह से काफी हद तक तमसा नदी को प्रदूषित होने से रोका जा सकता था। न्यूरो चिकित्सक आ जाने से जिले के लोग प्राइवेट न्यूरो चिकित्सकों के शोषण से बच जाते तथा जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो की इकाई खुलने से घूसखोर और अधिक भयभीत हो जाते और उनके संगठन के भय से घूस लेना बन्द कर देते।
भारत रक्षा दल का गठन
आजमगढ़। गठन के समय भारत रक्षा दल का आजमगढ़ से कोई सरोकार नहीं था। इसका गठन 21 सितम्बर 1997 को लखनऊ के गोमती तट पर 128 नौजवानों ने अपने खून का तिलक लगाकर किया। साथ ही संकल्प लिया कि अन्याय, शोषण व भ्रष्टïाचार के खिलाफ संघर्ष किया जायेगा तथा इन मुद्दों पर आमजन को जागरूक भी किया जायेगा। इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह बनाये गये। इस समय इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप सिंह यादव हैं। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि भले ही यह प्रदेशव्यापी संगठन हो मगर आजमगढ़ के अलावा कहीं पर भी इस संगठन का जमीनी वजूद नहीं है।
आजमगढ़ में कब पहुंचा भारत रक्षा दल
आजमगढ़। वर्ष 1998 में आजमगढ़ के तीन युवाओं हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, मो. अफजल व प्रवीण गौड़ ने इस संगठन की नीतियों से प्रभावित होकर इसकी सदस्यता ग्रहण की। पहले जिलाध्यक्ष मो. अफजल बनाये गये। यह तीनों लोग अभी भी पूर्ण मनोयोग के साथ इस संगठन को समर्पित हैं। इनमें हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव अपनी कर्मठता व सक्रियता के कारण इस समय प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं।
उमेश सिंह गुड्डïू को सौंपी कमान
आजमगढ़। भारत रक्षा दल ने इस जिले में एक बार काम करना शुरू किया तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने कर्तव्य पथ पर यह संगठन लगातार आगे बढ़ता चला गया। वर्ष 2000 में उमेश सिंह गुड्डïू ने इस संगठन की सदस्यता ग्रहण की और अपनी कर्मठता के कारण उसी वर्ष उन्हें संगठन के नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गयी। संगठन के प्रति उमेश सिंह गुड्डïू की समर्पण भावना को देखते हुए उन्हें वर्ष 2001 में सर्वसम्मति से जिलाध्यक्ष बना दिया गया। तब से अब तक इस पद पर रहते हुए वह अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।
एक घण्टा राष्टï्र को, एक मु_ïी समाज को
आजमगढ़। एक घण्टा राष्ट्र को, एक मु_ïी समाज को। यही मुख्य नारा है इस संगठन का। इस संगठन के लोगों ने बड़े से बड़े कार्यक्रम किये। यहां तक कि जिले में अन्ना हजारे के कार्यक्रम कराये। समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टï  कार्य करने के लिए मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित होने पर अरविन्द केजरीवाल को बड़ा आयोजन करके उन्हें सम्मानित किया मगर कभी किसी से चन्दा नहीं मांगा। इस संगठन के जिले में इस समय 7000 से अधिक सदस्य हैं। आपस में मिलकर यह लोग खर्चों का बोझ उठा लेते हैं। किसी के ऊपर दबाव भी नहीं रहता है। जिसकी क्षमता एक रूपये चन्दा देने की होती है वह उतना ही देता है। संगठन के कुछ सम्पन्न सदस्य टेण्ट या भोजन जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल लेते हैं। ऐसे में इनका बड़े से बड़ा कार्यक्रम यूं ही हंसते मुस्कराते हो जाता है। अपने नारे को इस संगठन के सदस्य अपने जीवन में उतारते भी हैं। इच्छुक सदस्य को ताला बन्द एक गोलक दी जाती है। इस गोलक में वह प्रतिदिन कम से कम एक रूपया जरूर डालते हैं। जो क्षमतावान हैं और उनकी इच्छा है वह अधिक भी डाल सकते हैं। वर्ष में एक बार सभी गोलक मंगाकर सबके सामने उसे खोला जाता है। रूपयों की गिनती होती है। आय-व्यय खुली किताब की तरह से होता है। उसका बाकायदा लेखा-जोखा होता है। वैसे इस संगठन का हर जिम्मेदार व्यक्ति बेहतर रोजगार में है। ऐसी स्थिति में वह संगठन को खुद ही हर वर्ष दस-बीस हजार रूपये देता ही है। यही वजह है कि इतना बड़ा संगठन होने के बावजूद आजतक कोई इसकी ईमानदारी पर अंगुली नहीं उठा सका है।
समाज को झकझोर देने वाले भारत रक्षा दल के आठ नारे
1. जय मातृ भूमि, जय भारत 2. जागेंगे जगायेंगे, भारत भव्य बनायेंगे 3. जो भ्रष्टïाचार से हो तंग, चले हमारे संग 4. एक घण्टा राष्टï्र को, एक मु_ïी समाज को 5. हमें किसी से बैर नहीं, गद्दारों की खैर नहीं 6. आने वाला कल, भारत रक्षा दल 7. ये हमारा वादा, रखेंगे राष्टï्र की मर्यादा 8. भारत रक्षा दल का है संदेश, जाति-धर्म से बड़ा है देश।
21 घूसखोरों को गिरफ्तार करा चुका है भारत रक्षा दल
आजमगढ़। भारत रक्षा दल जिला पूर्ति अधिकारी भागीरथी सिंह, सीएमओ के एम अग्रवाल, पुलिस भर्ती बोर्ड के सदस्य बनकर आजमगढ़ आये एएसपी राजेश कृष्ण सहित 21 घूसखोर अधिकारियों-कर्मचारियों को अब तक गिरफ्तार करा चुका है। होता यह है कि घूसखोर अधिकारियों- कर्मचारियों से प्रताडि़त व्यक्ति संगठन के लोगों से मिलता है। यह लोग अपने स्तर से सत्यता की पुष्टिï करते हैं। इसके बाद गोरखपुर एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क साधते हैं। एंटी करप्शन के लोग जिले में आकर संगठन के पदाधिकारियों से संपर्क साधने के बाद औपचारिकतायें पूर्ण कर कार्रवाई करते हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष उमेश सिंह गुड्डïू बताते हैं कि कई बार गिरफ्तार अधिकारियों कर्मचारियों के शुभचिन्तकों की ओर से उन्हें धमकियां भी मिलती हैं, मगर हम परवाह नहीं करते। ये जीवन तो समाज व राष्टï्र के लिए ही है। बड़ा काम करेंगे तो छोटी-छोटी बातें होंगी ही। यही सोचकर धमकाने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी नहीं करते हैं।
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