CHANDRIKA PARSAD YADAV
आजमगढ़। ‘कोई तो बोझ उठाये, कोई तो जिम्मा ले, उस इंकलाब का, जो आज तक उधार सा हैÓ। अपने पैतृक गांव मेजवां के विकास का यह जज्बा था प्रख्यात शायर कैफी आजमी के मन में। वह सोचते थे कि विकास का रथ जो उन्होंने चलाया है उनके बाद इसे आगे कौन ले जायेगा । मेंजवा के विकास को गति कौन देगा। फिलहाल उनके मरने के बाद उनकी बेटी सिने तारिका शबाना आजमी इस जिम्मेदारी को बखूबी सम्भाल रही हैं। उनके प्रयास से आज मेजवां में कोई बेरोजगार नहीं है। इस गांव की महिलाएं मशहूर फैशन डिजाइनों के परिधानों पर चिकनकारी करती हैं। इससे उन्हें अच्छी आय होती है। मुम्बई के फैशन शो में इन महिलाओं के चिकनकारी किये परिधान पहनकर मशहूर मॉडल रैंप पर उतरे तो मानो इनकी अनचाही मुराद पूरी हो गयी। फिलहाल विकास का यह रथ अब रूकने वाला नहीं है। मेजवां की इन महिलाओं के विकास पर डाक्यूमेन्ट्री फिल्म भी बनी है। अब जबकि स्टेट बैंक ने इस गांव को डिजिटल विलेज घोषित किया है तो यहां के लोगों की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं है।
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महानगरी मुंबई में आए दिन फैशन शो होते रहते हैं। उसमें मशहूर फैशन डिजाइनर द्वारा तैयार परिधान पहनकर फिल्म स्टार समेत मशहूर माडल रैंप पर जलवा बिखेरते हैं लेकिन अगर किसी छोटे से गांव की महिलाओं द्वारा की गई चिकनकारी के कपड़े पहनकर मुंबई जैसे महानगर में माडल और फिल्म स्टार रैंप पर उतरें तो निश्चित तौर पर उस गांव ही नहीं बल्कि जिले की अलग पहचान बन जाती है। कुछ इसी तरह की पहचान देश स्तर पर बन गई आजमगढ़ जिले के फूलपुर तहसील के मेजवां गांव की। मशहूर शायर कैफी आजमी का यह गांव उत्साह के समंदर में डूबा हुआ है। कारण कि इस गांव को स्टेट बैंक ने डिजिटल गांव घोषित किया है। ऐसा हो भी क्यों न। इस गांव की महिलाओं द्वारा की गई चिकनकारी के कपड़े पहनकर कई जानी-मानी हस्तियां कैट वाक कर चुकी हैं। मेजवां स्थित कैफी आजमी सिलाई-चिकनकारी सेंटर के इंचार्ज सखावत हुसैन और प्रशिक्षिका श्रीमती संयोगिता ने अपने गांव के विकास का पूरा श्रेय शबाना आजमी को दिया। कहा कि हमने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि मुंबई में यहां के तैयार कपड़ों को महत्व मिलेगा। चिकनकारी प्रशिक्षिका संयोगिता का कहना है कि  मेजवां के चिकनकारी करने वाले कारीगरों के हाथ अभी और भी मजबूत करना है। सेंटर इंचार्ज सखावत हुसैन ने कहा  कि अब लोग जाग उठे हैं। खास तौर से महिलाओं का हाथ मजबूत हुआ है। इस चिकनकारी के हुनर को विस्तार देने के लिए आजमगढ़, जौनपुर व वाराणसी के कई हिस्सों में सेंटर स्थापित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। कैफी गल्र्स इंटर कालेज की छात्रा बबिता ने बताया कि मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे रैंप पर चलने का अवसर मिलेगा मगर शबाना जी की वजह से हमें यह अवसर मिला। फिलहाल विकास का यह कारवां अब रूकने वाला नहीं है। प्रख्यात सिने तारिका शबाना आजमी व मेजवां यूथ की अध्यक्ष तथा जेट एयरवेज के मालिक की बेटी नम्रता गोयल ने मेजवां के विकास पर डाक्यूमेन्ट्री फिल्म बनवाई है। इस फिल्म में कैफी आजमी गल्र्स इण्टर कालेज, कैफी आजमी कम्प्यूटर सेन्टर एवं कैफी आजमी चिकनकारी सेन्टर की महिलाओं व छात्राओं के भी दृश्य फिल्माये गये है। शबाना आजमी यहां की चिकनकारी को वृहद रूप देने के लिये अपनी संस्था को देश के कई संस्थाओं के साथ सम्बद्ध करने के प्रयास में लगी हुई हैं।
 
मनीष मल्होत्रा और अनीता डोंगरे के कपड़े पर होती है चिकनकारी
आजमगढ़। कैफी आजमी सिलाई-चिकनकारी सेंटर में पचास से अधिक महिलाएं काम करती हैं। यहां प्रख्यात फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा और अनीता डोंगरे द्वारा दिए गए कपड़ों पर चिकनकारी की जाती है। यहां चिकनकारी किए कपड़ों की मुंबई में काफी मांग है। एक लहंगा अथवा साड़ी मुंबई में एक लाख से अधिक कीमत में बिकती है।
सबसे अलग है इनकी खुशियां
आजमगढ़। कैफी आजमी सिलाई-चिकनकारी सेंटर के इंचार्ज सखावत हुसैन और प्रशिक्षिका संयोगिता को खुशी इस बात की है कि उनकी मेंहनत का फल मिल रहा है तो दूसरी ओर उन महिलाओं व लड़कियों की खुशियां कुछ अलग ही है। सेंटर में काम करने वाली अनीता, सुनीता, रुकसाना, हुमा बानो, सलमा, हीरामती, विमला, मोनी, आरती, सुमन, शाहजहां, शबनम व कहकशां आदि का कहना है कि हमारे पास अपनी खुशियां बयां करने के लिए कोई शब्द ही नहीं है क्योंकि हमें कभी उम्मीद ही नहीं थी कि हमारे द्वारा की गई चिकनकारी की मुम्बई में इतनी डिमांड होगी।
कैफी साहब ने किया था संस्था का गठन
आजमगढ़। बालिका शिक्षा के साथ ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को निखारने की मंशा के साथ कैफी  साहब ने वर्ष 1993 में मेजवां वेलफेयर सोसायटी का गठन किया था। इस संस्था द्वारा कैफी आजमी गल्र्स इंटर कालेज व कैफी आजमी सिलाई-चिकनकारी सेंटर का संचालन किया जा रहा है। कैफी साहब की उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास संस्था से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा है। आज जहां कालेज में बच्चियों को शिक्षा मिल रही है वहीं चिकनकारी सेंटर में हुनर सिखाने के साथ उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है
मेजवां में एसबीआई करेगा कई काम
आजमगढ़। प्रख्यात दिवंगत शायर कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां में स्टेट बैंक कई काम करेगा। यह बात मेजवां के नजदीकी स्टेट बैंक की फूलपुर शाखा के प्रबंधक शैलेश सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ने भारत के कई गांवों का सर्वे कराने के बाद तयशुदा मानक पर खरा उतरने वाले देश के कुछ गांवों को डिजिटल गांव घोषित किया है। उनमें से एक गांव मेजवां भी है। सबसे बड़ा मानक यह था कि उस गांव के लोग कितना शिक्षित व जागरूक हैं। उनका कहना है कि इस गांव को डिजिटल विलेज घोषित कराने में शबाना जी का भी कम योगदान नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि गांव की आबादी करीब सात सौ है। इसमें से पांच सौ से अधिक लोगों के खाते खोले जा चुके हैं। कुछ लोगों के खाते अन्य बैंकों में भी हैं। इस गांव के डिजिटल गांव घोषित होने के बाद यहां के लोगों को नेटबैंकिंग से जोड़ा जायेगा और उसके प्रति जागरूक किया जायेगा। गांव को माइक्रो एटीएम से जोड़ा जायेगा जिसके माध्यम से लोग जमा व निकासी कर सकेंगे। आधार व बायोमेट्रिक सिस्टम से भी जमा व निकासी होगी। स्टेट बैंक ने गांव में कैम्प लगाकर लोगों का खाता खोलकर उनको एटीएम कार्ड व ग्रीन कार्ड दिया जा चुका है। इसके अलावा स्टेट बैंक ने इस गांव में वाटर कूलर भी लगवाया है। शीघ्र ही वाई फाई कनेक्टिंग की जायेगी तथा गांव में स्टेट बैंक ग्राहक सेवा केन्द्र खोलेगा। मेजवां गांव के युवा पहले से ही डिजिटल ट्रांजेक्शन कर रहे हैं। अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जायेगा। वह दिन दूर नहीं जब इस गांव के सभी लोग एसबीआई आधार भीम जैसे संसाधनों से लेन-देन करेंगे। एसबीआई फूलपुर के ही कस्टमर असिस्टेंट अविनाश सिंह ने कहा कि पहले मेजवां के लोगों को बैंक का चक्कर लगाना पड़ता था। अब लोगों को इससे छुटकारा मिल गया है। इसी बैंक शाखा के ट्रेनिंग आफिसर चन्दन पटवा का कहना है कि मेजवां के लोगों को वह हर बैंक सुविधा घर बैठे मिलेगी जिसके बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं है।
किसी बड़े शहर की सुव्यवस्थित कालोनी लगता है मेजवां गांव
आजमगढ़। आजमगढ़ जिले के फूलपुर कस्बे से दो किलोमीटर दूर स्थित मेजवां गांव किसी बड़े शहर के सुव्यवस्थित कालोनी जैसा लगता है। यहां पर लड़कियों के लिए इण्टर कालेज, कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेन्टर, यूबीआई का एटीएम, पोस्टआफिस, कौशल विकास प्रशिक्षण केन्द्र, सिलाई स्कूल, ब्यूटी पार्लर ट्रेनिंग सेन्टर, जरी जरडोजी का काम, चिकनकारी प्रशिक्षण केन्द्र आदि
प्रमुख है। चिकनकारी सीख रही लड़कियां यह मान रही कि काम तो गांव में बहुत हो गया। ऐसे में अब दायित्व उसे सहेजकर रखने की है। यह लड़कियां इसका सारे श्रेय शबाना आजमी को देती हैं। इनका कहना है कि शबाना जी के ही प्रयास से यह संभव हो पाया है। वह यह जरूर चाहती हैं कि गांव में लड़कियों के लिए डिग्री कालेज व एक अस्पताल हो जाय तो अच्छा रहेगा। चिकनकारी सेन्टर की प्रशिक्षिका संयोगिता कहती हैं कि अब्बू यानि कैफी आजमी साहब के निधन के बाद एक बार ऐसा लगा कि सब कुछ बर्बाद हो जायेगा मगर शबाना दीदी ने अब्बू के सपनों को पूरा किया। हम सबके सपनों को पूरा किया। हम लोग इस छोटे से गांव के रहने वाले लोग थे। कोई नहीं जानता था हमें। शबाना दीदी की वजह से आज हमें पूरा देश जान रहा है। हम बड़े-बड़े डिजाइनरों के कपड़ों पर चिकनकारी कर रहे हैं। जेट एयरवेज के मालिक की बेटी नम्रता गोयल तो अभी बच्ची है, मगर उसने भी शबाना दीदी के साथ मिलकर हम सबके लिए बहुत कुछ किया है। मुम्बई के इण्टरनेशनल हवाई अड्डïे पर हमारे चिकनकारी किये अब्बू की गजलें व हमारे संघर्ष की कहानियां कभी भी देखी जा सकती है।
मेजवां गांव से होता है तीन करोड़ से अधिक का सालाना कारोबार
आजमगढ़। मेजवां गांव से चिकनकारी का तीन करोड़ रूपये से अधिक का सालाना कारोबार होता है। मौजूदा समय में इस इलाके की तीन सौ से अधिक महिलायें व लड़कियां इस कारोबार में लगी हुई हैं। एक कारीगर करीब एक लाख रूपये सालाना कमा लेता है। प्रशिक्षिका संयोगिता कहती हैं कि यहां से सीखने वाली लड़की की अगर शादी हो जाती है तो वह अपने ससुराल रहते हुए भी हमसे जुड़ी रह सकती है। इसके लिए हम उसे उसकी ससुराल में ही कपड़ उपलब्ध करा दिया करते हैं। वह चिकनकारी करके कमाती रह सकती है या अपना खुद का काम कर सकती है। सब मिलाकर वह कभी किसी पर बोझ नहीं बनेगी। चिकनकारी सीख रही तीन सौ लड़कियों व महिलाओं में पचास से अधिक मेजवां गांव की ही हैं। इसके अलावा दूर-दराज के गांवों की भी हैं। इसके अलावा सिलाई, ब्यूटी पार्लर कोर्स, कम्यूटर कोर्स करके भी लड़कियां अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।  कैफी आजमी केन्द्र के अलावा इस गांव में अन्य कोई केन्द्र नहीं है। फूलपुर कस्बा स्थित न्यू आक्सफोर्ड पब्लिक  स्कूल के प्रबन्धक चन्द्रिका यादव का कहना है कि उनके विद्यालय में पढऩे वाले कई बच्चे मेजवां गांव के हैं।  गांव के डिजिटल विलेज होने के बाद वहां के अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए विद्यालय पर नहीं आना होगा। स्टेट बैंक को इस इलाके के और गांवों को डिजिटल गांव घोषित करना चाहिए।